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यबर्न के अनुसार- मनोविज्ञान ने अरस्तू के समय में दर्शनशास्त्र के अंग

रायबर्न के अनुसार- मनोविज्ञान ने अरस्तू के समय में दर्शनशास्त्र के

शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ : शिक्षा मनोविज्ञान, मनोविज्ञान के सिद्धांतों का शिक्षा के क्षेत्र

शिक्षा मनोविज्ञान, मनोविज्ञान के सिद्धांतों का शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग है ।

विकास : अर्थ एवं प्रकृति आज के युग में ज्ञान-विज्ञान के विकसित

विकास : अर्थ एवं प्रकृति आज के युग में ज्ञान-विज्ञान के विकसित

विकास एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है जो कि विश्व के समस्त प्राणियों में

विकास एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है जो कि विश्व के समस्त प्राणियों में

बाल विकास का अध्ययन क्षेत्र मनोविज्ञान के विकास के साथ-साथ धीरे-धीरे विस्तृत

शिक्षा मनोविज्ञान की विधियाँ : शिक्षा मनोविज्ञान में अध्ययन तथा अनुसंधान हेतु सामान्य

छात्रों (बालकों) के सर्वांगीण विकास को विकास के अध्ययन में एक स्थायी

बालक के सतत (निरंतर) तथा जीवन भर समग्र विकास के लिए वातावरण

परिवार तथा स्कूल के वातावरण के बाद समाज बाल विकास को प्रभावित

जीन पियाजे का संज्ञानात्मक और नैतिक विकास का सिद्धान्त शिक्षा मनोविज्ञान में

हर मकान की आधार शिक्षा उसकी अन्य संरचना से ज्यादा महत्त्वपूर्ण होती

मानव विकास का अध्ययन शिक्षा मनोविज्ञान का महत्वपूर्ण अंग है। एक शिक्षक

बाल्यावस्था की प्रमुख विशेषताएं : 1. जिज्ञासा की प्रबलता- बालक की जिज्ञासा विशेष रूप से

बाल्यावस्था की प्रमुख विशेषताएं : 1. जिज्ञासा की प्रबलता- बालक की जिज्ञासा विशेष रूप से

मानव विकास की सबसे विचित्र तथा जटिल अवस्था किशोरावस्था है। इसका काल 12 वर्ष

मानव जीवन का प्रारम्भ अथवा आरम्भ उसके पृथ्वी पर जन्म लेने से

ज्ञानात्मक विकास एवं उसकी अवस्थायें : 1. ज्ञानात्मक विकास का स्वरूप एवं विशेषताएं- बहुतों में

संवेगात्मक विकास : संवेग से आशय- संवेग शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘Emotion’ शब्द का हिन्दी रूपांतर

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। जन्म से ही वह अपनी आवश्यकताओं की

बालक अपने वातावरण में कई व्यक्तियों एवं वस्तुओं से घिरा रहता है।

भाषा विकास बौद्धिक विकास की सर्वाधिक उत्तम कसौटी मानी जाती है। बच्चे

विविध मनोवैज्ञानिकों ने ऐसा माना है कि शारीरिक विकास अगर उत्तम होता

विकास काल का प्रारम्भ बालक के जन्म से माना जाता है और

बालक में पैदा विशेषताओं हेतु उसके माता-पिता को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया

वातावरण शब्द के स्थान पर पर्यावरण को प्रयुक्त किया जाने लगा है, अगर

बालक का विकास तथा वृद्धि उसकी शिक्षा पर निर्भर करती है। इसलिए

बालक के विकास को प्रभावित करने वाले अन्य कारक निम्नानुसार हैं- 1. जनसंचार

बाल्यावस्था जिसका समय विद्वानों ने 6 से 12 वर्ष तक माना है। विकास का वह 6 काल होता

(अ) बाल्यावस्था के विकासात्मक कार्य तथा उसके अभिप्रेतार्थ : शैशवावस्था के उपरांत लगभग 6 से 12 वर्ष

संवेगों के प्रकार लगभग तीन माह की अवस्था से ही बालक में

हर सामाजिक समूह बालकों से यह अपेक्षा करता है कि वह संवेगों

व्यक्तित्व के सम्बन्ध में फ्रॉयड ने अपने विचार लक्षणवाद तथा संरचनावाद से

समाजीकरण में लैंगिक विभिन्नता बाल्यावस्था से परिलक्षित होने लगती है। इस समय

एरिक्सन व्यक्तित्व निर्धारण तथा उसके विकास को स्वाभाविक रूप में मानता है।

बच्चे के पूर्व बाल्यावस्था के अनुभव उसके बाद के व्यक्तित्व को भी

सामाजिक तथा असामाजिक व्यवहार प्रतिमान को बालक अपने जीवन के प्रारsम्भिक काल

लैंगिक विकास एक सामाजिक सिद्धान्त है । लैंगिक रुप से यदि देखा

जन्म के समय बालक में संवेगात्मक अनुक्रिया की योग्यता पायी जाती है।

संवेग के कार्य 1. अन्तर्वैयक्तिक कार्य- संवेग के अर्न्तवैयक्तिक कार्य बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं।

जॉन बोल्बी (1907-1990) फ्रायड की तरह ही एक मनोविश्लेषण थे एवं मानसिक स्वास्थ्य

संवेगात्मक विकास के सिद्धान्त : बालकों में संवेगात्मक विकास की प्रक्रिया महत्त्वपूर्ण होती

लिंग आधारित सामाजिक-वर्ग समूह निम्न हैं- बुद्धिमत्ता- समाज परंपरागत रूप से भिन्न

सामाजिक विकास के प्रतिमान : सभी संस्कृतियों के बच्चों में सामाजिक विकास के

बालकों तथा प्रौढ़ों के संवेग समान नहीं होते हैं। प्रौढ़ो में संवेग

जन्म के समय बालक न तो सामाजिक होता है और न असामाजिक

सामाजीकरण की संस्थाएं सामाजीकरण एक जटिल प्रक्रिया है। सामाजीकरण की प्रक्रिया के

विद्यालय शिक्षा का महत्त्वपूर्ण, श्रेष्ठ तथा सक्रिय साधन है। बालक के समाजीकरण में

समाजीकरण की प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका विद्यालय में समाजीकरण का कार्य

समाजीकरण में साथियों की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। साथियों के व्यवहार

मानव एक सामाजिक प्राणी है। मनुष्य का सामाजिक बनना एक लम्बी प्रक्रिया

सामाजीकरण की क्रिया पर लिंग भेद का भी प्रभाव पड़ता है। बच्चा

बाल विकास में बच्चों-बड़ों के आपसी सम्बन्ध तथा मित्र-समूह का प्रभाव बालक

प्रायः लड़के तो लड़कों के साथ व लड़कियाँ लड़कियों के साथ रहना