सामाजीकरण में लिंग भेद के प्रभाव के बारे में लिखो।

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सामाजीकरण की क्रिया पर लिंग भेद का भी प्रभाव पड़ता है। बच्चा लड़का है या लड़की यह भी सामाजीकरण की गति निर्धारित करता है। अधिकतर देखने में आया है कि लड़कियों में सामाजीकरण की प्रक्रिया लड़कों की अपेक्षा अधिक तीव्र होती है। वह अधिक सभ्य, संस्कारी व सामाजिक मूल्यों को महत्त्व देने वाली होती है। वह सामाजिक मूल्यों को जल्दी व बिना किसी तर्क के आसानी से अपनाने लगती हैं जबकि लड़कों में यह अपेक्षाकृत धीमी होती है ।

वह सामाजिक मूल्यों को अपनाने की उपेक्षा तोड़ने में अधिक विश्वास रखते हैं। देखने में आता है कि बेटों की अपेक्षाकृत बेटियाँ माता-पिता व रिश्तेदारों को अधिक सम्मान देती हैं। लड़के जिन मूल्यों को दबाव में अपनाते हैं लड़कियाँ वहीं सामाजिक मूल्यों की प्रेम सहित अपनाती हैं। इस कारण लड़के का सामाजीकरण लड़कियों की अपेक्षा धीमा होता है।

बालक व बालिकाओं में विषमलिंगी आकर्षण होता है। सामान्य रूप से बालिकाएं अपने पिता से प्रेम करती हैं और बालक अपनी माता से बालकों में अपने समूह का मुखिया बनने जैसी प्रवृत्ति पाई जाती है वहीं बालिकाएं स्वभाव में लज्जालु होती हैं। इन्हीं कारणों से दोनों के सामाजिक विकास में अन्तर होता है।

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